23 साल की हामना जफर पाकिस्तान मूल की हैं और इस वक्त अमेरिकी एयरफोर्स में सर्विंग ऑफिसर हैं। चार साल पहले हामना के पेरेंट्स उन्हें बिना वजह बताए पाकिस्तान ले गए। वहां हामना के निकाह की पूरी तैयारियां थीं। हामना अपने सपने पूरे करना चाहती थीं।
वो किसी तरह पाकिस्तान से अमेरिका आ गईं और अब अमेरिकी एयरफोर्स में हैं। अमेरिकी मैगजीन ‘द पीपुल’ ने हामना के संघर्ष और परिवार छोड़ने की कहानी बयां की हैं। आइए इसे तफ्सील से जानते हैं।
19 की उम्र में शादी कराना चाहते थे पेरेंट्स
- हामना सिर्फ 19 साल की थीं। एक दिन उनके पेरेंट्स ने पूरी फैमिली के साथ पाकिस्तान जाने का फैसला किया। इसकी कोई वजह नहीं बताई गई थी। हामना के मुताबिक- मैं ‘ड्रीम अमेरिका’ में यकीन करती हूं। उस वक्त भी पाकिस्तान नहीं जाना चाहती थी। कट्टरपंथी मुस्लिम फैमिली की मेंबर होने के नाते पाकिस्तान जाने के हुक्म को टाल नहीं सकी।
- हामना कहती हैं- हमेशा पेरेंट्स के बारे में सोचा करती थी। एक छोटी बहन भी थी। लेकिन, पाकिस्तान में एक रात के बाद सिर्फ मैंने खुद के बारे में सोचना शुरू किया। अमेरिका में हमारी फैमिली मेरीलैंड में रहती है। पढ़ाई में शुरू से बहुत अच्छी थी। यही अच्छी रहा कि पेरेंट्स ने कभी पढ़ाई से नहीं रोका। लेकिन, वो बहुत जल्द मेरी शादी कर देना चाहते थे।
- हामना आगे कहती हैं- मुझे उम्मीद थी कि पेरेंट्स अमेरिकी कल्चर को समझेंगे। मुझे कॅरियर बनाने देंगे। लेकिन, वो जल्द से जल्द मेरा निकाह कर देना चाहते थे और वो भी अरेंज्ड मैरिज।
पाकिस्तान में क्या हुआ
- हामना के मुताबिक- 2019 में जब मैं पाकिस्तान पहुंची तो एक शाम घर में किसी फंक्शन की तैयारी थी। कुछ देर बाद पता लगा कि मेरी सगाई होने वाली है। सामने ज्वैलरी और कई तरह के खूबसूरत ड्रेसेज थे। पेरेंट्स चाहते थे कि मैं 20 साल की होने वाली हूं। किसी दूसरे पुरुष से आंखें न मिलाऊं, इसलिए वो शादी कर देना चाहते थे।
- हामना के मुताबिक- मेरी सगाई मेरे ही कजिन से तय की गई। सब बहुत खुश थे। लेकिन, मैं तकलीफ में थी। जिस शख्स से मेरी सगाई की गई, उससे मैंने शायद ही कभी बात की। चंद दिन बाद हम अमेरिका लौट आए। मैंने मां को समझाने की बहुत कोशिश की। जब उन्हें पता लगा कि मैं तो अमेरिकी सेना में जाने का सपना देख रही हूं, वो नाराज हो गए। मजबूरी ये थी कि मैं उन पर ही निर्भर थी हामना कुछ करतीं, इसके पहले ही कोविड का दौर शुरू हो गया। जफर कहती हैं- वो थका देने वाला वक्त था। एक समय तो मुझे लगा कि मेरे सपने टूट चुके हैं और मुझे पेरेंट्स की बात माननी ही होगी।
फिर कैसे बदले हालात