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देशभर की निचली अदालतों में 63 लाख केस वर्षों से पड़े, वजह जान हैरान रह जाएंगे आप

अपडेट Jan 23, 2023 05:27 pm IST
नई दिल्ली: क्या आपको पता है कि भारत की निचली अदालतों में 4 करोड़ से ऊपर पेंडिंग केस हैं। इनमें से 63 लाख मामले ऐसे हैं जिनपर वकील की गैरमौजूदगी के चलते कोई फैसला नहीं हो सका है। नैशनल ज्यूडिशयल डेटा ग्रिड के अनुसार, 20 जनवरी तक मिले आंकड़ो पर गौर करें तो कम से कम 78 प्रतिशत पेंडिग केस क्रिमनिल और बाकी सिविल हैं। वहीं राज्यवर बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा पेंडिंग केस इसी वजह से हैं। वहीं 63 लाख में 49 लाख पेंडिंग केस दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में हैं।
वकील ने गिनाई क्या है वजह
पेशे से अधिवक्ता केवी धनंनजय ने इसके कारण गिनाए हैं। उन्होंने बताया कि भारत में पेंडिंग केस की संख्या क्यों ज्यादा है इसके कई कारण हैं। इनमें वकीलों की मौत, अधिवक्ताओं की अक्षमता, अभियोग पक्ष की ओर से वकील फिक्स करने में देरी और मुफ्त कानूनी सेवाओं की प्रभावहीनता प्रमुख कारण हैं। वहीं अनीशा गोपी ने भी इसके बारे में खुलकर बात की। अनीशा ने न्याया नामक एक संस्थान खोला है। इसकी मदद से लोगों को कानूनी हक को समझने में मदद करती है। अनीशा ने कहा कि पेंडिंग केस में देरी एक बहुत बड़ा अवरोधक है और इसके कई कारण हैं। इनमें केसों की ज्यादा संख्या, जजों की कमी और कई वजहों से केस को स्थगित करना प्रमुख हैं।
वकीलों पर भी होता है अत्यधिक दबाव
गोपी ने आगे कहा कि कई बार वकीलों पर ज्यादा दबाव भी होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कोर्ट में जिस तरह से रजिस्ट्री काम करती है, उसमें सबसे अंतिम समय में केस की लिस्टिंग होती है। इस वजह से वकील को दबाव में किसी एक सुनवाई को छोड़ना पड़ता है। अनीशा ने आगे कहा कि भारत में औसत तौर पर एक केस को पूरा होने में 4 साल तक लग जाते हैं। जब कोर्ट में इतने लंबे समय तक मुकदमा चलता हो तो ऐसे में पीड़ित संसाधनों की कमी के चलते वकीलों को महंगी फीस नहीं दे पाता है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने साल 2017-18 और 2021-22 में एक डेटा जारी किया था। इसमें बताया गया कि 1 करोड़ से ऊपर लोगों ने नि: स्वार्थ कानूनी सेवाओं का आनंद लिया है।

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