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'इंडिया' की मीटिंग में All Set! क्या नीतीश को मिलेगी खुशखबरी, जानिए इनसाइड स्टोरी

अपडेट Jan 13, 2024 01:06 pm IST
पटना: क्या संयोजक-संयोजक के खेल का आज पटाक्षेप होगा? या फिर इंडिया गठबंधन के सूत्रधार नीतीश कुमार खरमास के बाद राजनीत को कोई नया मोड़ देकर देश में उथल-पुथल मचा देंगे? इस फलसफे पर जदयू के राजनीतिक सलाहकारों के लिए दिल्ली में I.N.D.I.A की हो रही वर्चुअल बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि आज की बैठक में नीतीश कुमार को तरजीह नहीं मिलती है तो जदयू के रणनीतिकार किसी नए राजनीतिक धरातल का सूत्रपात भी कर सकते हैं।

JDU पॉलिटिक्स की साख है दांव पर

दरअसल, जिस उत्साह के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के विरुद्ध एक मुहिम तैयार की, वो इंडिया गठबंधन की पहली बैठक से ही तार-तार होते दिखी। ये दीगर कि जदयू के रणनीतिकारों ने एक बड़े गोल को ध्यान में रख कर चार बैठकों तक सम्मानजनक भूमिका का इंतजार किया। मगर, इंडिया गठबंधन की तमाम बैठकों में जदयू नेतृत्व को निराशा ही हाथ लगी है। जहां तक नीतीश कुमार की राजनीति का सवाल है तो वे लोकतंत्र में 'साख' की राजनीति करते हैं संख्या की नहीं। यही वजह भी है कि इस 'साख' की खातिर जदयू के तमाम नेताओं ने अपने-अपने तरीके से इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं तक अपनी बात पहुंचा दी है।

नीतीश की राजनीति का अपना लाइन-लेंथ


गठबंधन की राजनीति के 'मास्टरमाइंड' माने जाने वाले नीतीश कुमार कभी भी अपने ऊपर दबाव की राजनीति को हावी होने नहीं देते। भाजपा के साथ रह कर भी वे किसी दबाव से मुक्त रह कर तब भी मुख्यमंत्री बने, जब भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आ गई। नीतीश नीत सरकार में जब भाजपा सरकार में थी तो हर आए दिन बीजेपी के मंत्री ये कहते रहे कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते। बहुत कुछ ऐसा ही व्यवहार राजद के साथ भी रखा। ऐसे कई मौके आए जब राजद के मंत्रियों के किए गए निर्णय को खारिज किया।

इन सबके बीच इंडिया गठबंधन में नीतीश कुमार के राजनीतिक तेवर को शुरू से ही कमतर करने की रणनीति पर काम हुआ। इस काम में कांग्रेस अकेले नहीं, कई मोर्चे पर राजद, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी रही। नीतीश कुमार जिस तरह से इंडिया गठबंधन को गाइड करना चाहते थे, वो नहीं हो पाया। न संयोजक बनाया, न सीट शेयरिंग पर बात की। चार बैठक के बाद भी कॉमन मेनिफेस्टो नहीं बना और न ही संयुक्त रैली के कार्यक्रम ही तय हुए।

ये विरोध के लिए केवल विरोध नहीं


राजनीतिक गलियारों में जदयू के शीर्ष नेताओं के बयानों को सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध नहीं मानते। राज्य के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने सीट बंटवारे में देरी का सवाल उठाने के बहाने अपनी नाराजगी जाहिर की। ये वे लोग हैं, जो नीतीश कुमार की राजनीति को बदलाव के रास्ते उतारते रहे हैं। दो बार राजद के साथ सरकार बनाने के कारण और कर्ता भी यही रहे। इस बार फिर नीतीश कुमार के करीबी मंत्रियों के विरोध में एक नई राजनीति की बू आ रही है। आज की बैठक में अगर कुछ सकारात्मक निर्णय जदयू या नीतीश कुमार के फेवर में नहीं होता है तो इनकी राजनीति अलग धार भी पकड़ सकती है।


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