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गुलमोहर' की स्‍क्रीनिंग पर मनोज बाजपेयी ने तनुजा को पैर छूकर किया प्रणाम, लोग बोले- संस्‍कार!

अपडेट Mar 02, 2023 07:55 pm IST
मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी फिल्‍म 'गुलमोहर' को लेकर चर्चा में हैं। शुक्रवार, 3 मार्च को यह फैमिली ड्रामा डिज्‍नी प्‍लस हॉटस्‍टार पर रिलीज हो रही है। मुंबई में मंगलवार को फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग रखी गई थी, जिसका एक वीडियो क्‍ल‍िप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मनोज बाजपेयी बीते जमाने की दिग्‍गज एक्‍ट्रेस और कालोज की मां तनुजा के पैर छूते हुए नजर आते हैं। इतना ही नहीं, मनोज सीढ़‍ियों से उतर रहीं 79 साल की तनुजा की मदद के लिए उनका हाथ थामे हुए दिख रहे हैं। यह वीडियो क्‍ल‍िप स्‍क्रीनिंग के बाद का है। मनोज बाजपेयी की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। कोई इसे भारतीय संस्‍कृति से जोड़कर देख रहा है, तो किसी का कहना है कि यह उनके मन में बड़ों के प्रति आदर और विनम्रता की निशानी है।

वायरल वीडियो में मनोज बाजपेयी और तनुजा के साथ शर्मिला टैगोर की बेटी सबा अली खान भी नजर आ रही हैं। सबा 'गुलमोहर' फिल्‍म का हिस्‍सा हैं। जब मनोज बाजपेयी आदर भाव से तनुजा के पैर छूते हैं तो सबा यह देखकर मुस्‍कुराती हैं। मनोज बाजपेयी के इस वीडियो को देखकर एक यूजर ने इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट के नीचे लिखा है, 'आपके लिए बहुत सारा प्‍यार मनोज सर। आप बहुत ही विनम्र इंसान हैं और सबका सम्‍मान करते हैं।'

एक अन्‍य यूजर ने लिखा है, 'यही हमारी संस्‍कृति है। बड़ों का आदर करना। उनका सम्‍मान करना। Manoj Bajpayee बेहतरीन एक्‍टर ही नहीं, अच्‍छे इंसान भी हैं।' बहरहाल, 'गुलमोहर' फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग पर सितारों का मजमा लगा था। बॉलीवुड से फातिमा सना शेख, राश‍ि खन्‍ना, नंदिता दास, सैयामी खेर, अलका याग्‍न‍िक, बोमन ईरानी भी इस इवेंट में मौजूद थे। वैसे, इस हसीन शाम की पूरी लाइमलाइट मनोज बाजपेयी की पत्‍नी शबाना उर्फ नेहा ने लूट ली। बॉबी देओल के साथ 'बरसात' जैसी फिल्‍मों में काम कर चुकीं नेहा आम तौर पर लाइमलाइट से दूर रहती हैं। ऐसे में स्‍क्रीनिंग पर उनकी मौजूदगी चर्चा का केंद्र बनी हुई थी।

'गुलमोहर' में मनोज बाजपेयी पहली बार शर्मिला टैगोर के साथ काम कर रहे हैं। फिल्‍म की कहानी बत्रा परिवार की है, जो दिल्‍ली के एक बेहद पॉश इलाके में रहता है। यह परिवार 31 साल से अपने पैतृक घर में रह रहा है, लेकिन अब एक नए शहर में बसेरा बसने वाला है। कहानी इस परिवार के अपने पैतृक घर में आख‍िरी चार दिनों की है।

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