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बजट में चुनाव से पहले बड़ा ऐलान, जमीन मालिक व डेवलपर के बीच एग्रीमेंट पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी आधी होगी

अपडेट Feb 24, 2023 06:23 pm IST

गरीब वर्ग को निजी डेवलपर से ईडब्ल्यूएस मकान लेने पर लगने वाली 5% की स्टांप ड्यूटी से छूट मिलेगी। इसी तरह डेवलपर और भूमि मालिक के बीच किसी प्रोजेक्ट के एग्रीमेंट (जेवी) और नगरीय निकाय में प्रॉपर्टी बंधक रखने के अनुबंध पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी भी आधी होने वाली है। जेवी का पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत है, जिसे एक हजार रुपए किया जा सकता है। ये दोनों घोषणाएं इसी बजट में हो जाएंगी। रियल एस्टेट को बढ़ावा देने के लिए ये फैसले लिए जाएंगे।

कुछ समय पहले बिल्डर और डेवलपर्स ने सरकार से मिलकर डिमांड रखी थी कि विकास के अनुपात में बंधक भूखंडों को भी मुक्त किया जाए। यह अधिकार अनुविभागीय अधिकारी के पास हो। डेवलपमेंट की मंजूरी भी इनके ही हाथ में हो। रेरा में प्रोजेक्ट पंजीकृत होने के बाद आवास बेचने से मिलने वाली 30% राशि रेरा के प्रोजेक्ट अकाउंट में जमा रहती है। दूसरी तरफ भूखंड/संपत्ति को बंधक भी रखा जाता है। बंधक वाली व्यवस्था को खत्म किया जाए। इसी तरह बंधक भूखंड/संपत्ति को बंधन से मुक्त करने के लिए कोलोनाइजर, नगर निगम और रहवासी संघ के बीच त्रिपक्षीय अनुबंध आवश्यक रखा गया है। यह पूरी तरह अव्यवहारिक है। नगर निगम खुद प्रोजेक्ट में हुए विकास कार्यों की जांच कर ले। इन पर भी विचार चल रहा है। मुख्यमंत्री इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।

फैसलों का कैलकुलेशन- अभी 50 गुना पर 1% स्टाम्प ड्यूटी, ये आधी हो जाएगी

प्रापर्टी बंधक

उदाहरण के लिए 10 करोड़ का प्रोजेक्ट है और निगम का सुपरविजन चार्ज करीब एक करोड़ रु. आता है तो कैलकुलेशन के मुताबिक इस एक करोड़ रुपए को 50 गुना किया जाएगा। जो 50 करोड़ होगा। फिर इसी पर 1% स्टांप ड्यूटी और 0.8% पंजीयन शुल्क देना होता है। यह आधा होगा।

भू-स्वामी-डेवलपर के बीच एग्रीमेंट

भूमि स्वामी व डेवलपर के बीच यदि क्रमश: 70 व 30 का एग्रीमेंट है, यानि 30 फीसदी जमीन पर डेवलपर प्रोजेक्ट बनाएगा। तब भी 50 फीसदी जमीन मानकर 5% स्टांप ड्यूटी और 0.8% रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है। यह आधा होगा।

ये मांगें लंबे समय से अटकीं- जहां मास्टर प्लान अमल में नहीं, वहां भूमि विकास नियम लाएं

  • जहां मास्टर प्लान प्रचलन में नहीं आया है, वहां भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानों को पुराने मास्टर प्लान पर प्राथमिकता दी जाए। भोपाल में इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
  • भोपाल का मास्टर प्लान भी जल्द आए। धारा 16 को सरल किया जाए।
  • पंचायत क्षेत्र में कॉलोनाइजर एक्ट काे सरल करें। शहरी के साथ एकरूपता रहे।
  • मप्र में फ्लोर एरिया रेशो और बिल्डिंग की हाइट से संबंधित नियमों पर विचार हो। उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना आदि की तुलना में मप्र में बिल्डिंग की हाइट कम होती है। इसे बढ़ाया जाए।
  • अतिरिक्त एफएआर बेचने में लगने वाली फीस को कम किया जाए।
  • सरकारी की अनुमति के अतिरिक्त किए गए निर्माण में सेल्फ एसेसमेंट व्यवस्था को फिर लागू किया जाए।
  • बाजार मूल्य के आधार पर विकास शुल्क नहीं लेना चाहिए।


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