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संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत और लाइबेरिया के बीच बड़ी डील, समुद्री इलाके में होगा जबरदस्त फायदा

अपडेट Sep 26, 2026 11:56 am IST
नई दिल्ली: भारत ने लाइबेरिया के साथ मिलकर 'शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा' पर 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' बनाने के लिए हाथ मिलाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई पहली बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि समुद्री व्यापार में रुकावट डालने वाले और बेगुनाह लोगों की जान लेने वाले काम किसी भी तरह से सही नहीं ठहराए जा सकते।

इस बैठक में रूस, जर्मनी और जापान समेत 23 अन्य देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ राजनयिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हम यहां इस खतरनाक चलन को उजागर करने के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने और ऐसे हमलों को रोकने की अपील करने के लिए आए हैं।

पीएम मोदी के प्रस्ताव का किया जिक्र

उन्होंने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया जिसमें जरूरतमंद नाविकों की मदद के लिए 'नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क' बनाने की बात कही गई थी।

एस जयशंकर ने बताया 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' का फायदा

जयशंकर ने बताया कि 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' में जहाज के मालिक प्रमुख सदस्य देश, सबसे ज़्यादा जहाज पंजीकरण वाले देश और सबसे ज्यादा नाविक उपलब्ध कराने वाले देश शामिल हैं। नागरिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।

हाल में भी दोनों देशों के बीच हुए कई समझौते

बता दें कि हाल ही में लाइबेरिया के सेंट्रल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बीच कृषि अनुसंधान और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी समझौता हुआ था। इसके अलावा दोनों देश तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपसी सहयोग को लगातार बढ़ा रहे हैं। भारतीय कंपनियां लाइबेरिया के खनन और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम कर रही है।

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