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रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के आदेश नहीं मान रहे बिल्डर! जीत के बाद भी बायर्स को लड़नी पड़ रही जंग

अपडेट Nov 21, 2022 08:12 pm IST
नई दिल्ली: रेरा (Real Estate Regulatory Authority) के गठन के बाद भी बड़ी संख्या में बायर्स (Buyers) का संघर्ष जारी है। 5 साल में रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) ने 40 हजार से भी ज्यादा मामलों में फैसला सुनाया है। इनमें से 13 हजार केस ऐसे हैं जिनमें बिल्डरों ने आदेश नहीं माना है। फ्लैट खरीदारों को लंबे समय तक रेरा (Real Estate Regulatory Authority) में लड़ाई लड़ने के बाद कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ऐसे मामलों की संख्या रेरा (Real Estate Regulatory Authority) में लगातार बढ़ रही है। स्थिति यह है कि बायर्स (Buyers) को रेरा का आदेश मनवाने के लिए हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ रहा है।
रेरा के ही रेकॉर्ड के अनुसार, 13 हजार केस पिछले 5 साल में ऐसे हैं जिनमें खरीदार (Buyers) के पक्ष में फैसला हुआ, लेकिन फिर भी लड़ाई खत्म नहीं हुई। इन 13 हजार में 7300 आदेश रिफंड देने से संबंधित हैं। 4300 आदेश फ्लैट का पजेशन देने से संबंधित हैं। रिफंड वाले आदेशों में कई बिल्डरों की तो आरसी भी जारी हो गई हैं, लेकिन उसके बाद भी बायर (Buyers) की लड़ाई वहीं की वहीं है। 13 हजार आदेशों में से केवल 1250 मामले ऐसे हैं जिनमें दोबारा केस करने पर बिल्डर सेटलमेंट करने के लिए बायर्स के पास आए हैं और मामलों का निस्तारण हुआ है। इस लड़ाई में बायर के कई साल खराब हो गए साथ ही पैसे की भी बर्बादी हुई।


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