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कंगाली में आटा गीला! पाकिस्तान की पीठ में 18 अरब डॉलर का छुरा घोंपेगा 'दोस्त' ईरान अगर... दी धमकी

अपडेट Feb 02, 2023 06:04 pm IST
इस्लामाबाद : आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान को ईरान ने 18 बिलियन डॉलर के जुर्माने की धमकी दी है। उसने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अगर मल्टी-बिलियन डॉलर का गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो पाकिस्तान को जुर्माना देना होगा। पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट द न्यूज के अनुसार, ईरानी ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने पाकिस्तान को अपने क्षेत्र में 'ईरान-पाकिस्तान गैस लाइन प्रोजेक्ट' के एक हिस्से के निर्माण को पूरा करने के लिए फरवरी-मार्च 2024 तक का समय दिया है, अन्यथा उसे भारी भरकम जुर्माने का सामना करना होगा।
खबरों के अनुसार, ईरान के अधिकारियों ने बीते दिनों एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि गैस पाइपलाइन एग्रीमेंट एक साल के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। ईरान गैस फील्ड से पाकिस्तान सीमा तक प्रोजेक्ट के अपने हिस्से को पहले ही पूरा कर चुका है। पड़ोसी देशों ईरान-पाकिस्तान के बीच यह समझौता 2009 में हुआ थी जब पाकिस्तान में पीपीपी की सरकार थी। समझौते के अनुसार, इस्लामाबाद 800 किमी लंबी पाइपलाइन का निर्माण करेगा लेकिन प्रोजेक्ट 13 साल से लगातार टलता ही जा रहा है।

2019 में ही ईरान ने दी थी चेतावनी

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तानी अधिकारियों ने तेहरान को इस बात की जानकारी दी है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वे इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा सकते। समझौते के मुताबिक, ईरान 2024 तक देरी के चलते किसी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं जा सकता। साल 2019 में ईरान ने पाकिस्तान को आईपी गैसलाइन प्रोजेक्ट के तहत निर्धारित समय अवधि में पाकिस्तानी क्षेत्र में पाइपलाइन नहीं बिछाने के लिए एक मध्यस्थता अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी थी।

कंगाली में पाकिस्तान का आटा गीला

पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है लेकिन तब जब ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए जाएं। ईरान की तरफ से पाकिस्तान पर 18 बिलियन डॉलर के जुर्माने की धमकी ऐसे समय में आई है जब इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने वाला है और जनता महंगाई के बोझ तले दबी हुई है। शहबाज सरकार कर्ज के लिए आईएमएफ के आगे हाथ फैलाए खड़ी जो बदले में उन पर कई जन-विरोधी फैसले लेने का दबाव बना रही है।

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