छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा हाल में भारत सरकार द्वारा पारित कानून, भारतीय न्याय संहिता पर कार्यशाला पुलिस मुख्यालय सिविल लाईन, रायपुर में आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में नवीन कानून के विभिन्न पहलूओं पर पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया जा रहा था। उक्त न्याय संहिता में पुलिस की कार्यप्रणाली तथा न्यायालयीन कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने संबंधित प्रावधानों का जब जिक्र किया गया तो माननीय गृहमंत्री श्री विजय शर्मा जी ने कटाक्ष किया कि "नवीन न्याय संहिता के प्रावधानों के लागू होने पर अब पुलिस स्कूटी में सोना प्लांट कर किसी निर्दोष को नहीं फंसा सकती।" गृहमंत्री जी उक्त टिप्पणी से सभा कक्ष में उपस्थित कुछ पुलिस अफसरों के चेहरों पर हवाईयां उड़ गई। थोड़ी ही देर में सभा कक्ष में उपस्थित सभी गणमान्य जनों को उक्त टिप्पणी के संदर्भ की सम्पूर्ण जानकारी का खुलासा हो गया। यह घटना 01 जुलाई 2021 से संबंधित थी जब शेख आरिफ 2005 बैच आईपीएस अफसर ने डीआईजी, एसीबी / ईओडब्ल्यू रहते हुए एक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अफसर के स्कूटी में 02 किलोग्राम सोना गढा था तथा तदुपरान्त उससे मारपीट कर स्वीकारोत्ति करवायी कि उक्त 02 किग्रा सोना श्री जी.पी. सिंह का है। श्री जी.पी. सिंह को षडयंत्र पूर्वक फंसाने के लिए शेख आरिफ तथा इसके सिंडिकेट के द्वारा अनेकों गवाहों को इस प्रकार से डरा धमकाकर फर्जी गवाही करवायी गई थी। उन सभी गवाहों को द्वारा सरकार बदलने के बाद स्वतंत्र रूप से उनके प्रताड़ित करने की गाथाएं सुनाई जा रहे हैं कि किस प्रकार से शेख आरिफ द्वारा उनको मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना दिया गया। सभाकक्ष में बहुत जल्द समस्त पुलिस अफसरों एवं गणमान्य जनों को उक्त घटना का खुलासा हो गया। तत्कालीन सरकार में शेख आरिफ द्वारा अनेकों लोगों को फर्जी अपराधों में फंसाने के कारनामे किये गए हैं जिनकी शिकायतें पीड़ितों द्वारा शासन स्तर तक की गई है। आम लोगों का इंतजार है कि वर्तमान सरकार शेख आरिफ के खिलाफ उसके द्वारा कारित फर्जी कारनामों तथा किये गये भ्रष्टाचार की जाँच कब तक करती है।