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मैं तो सीएम की कुर्सी छोड़ना चाहता हूं... चुनाव से पहले अशोक गहलोत ने क्या संदेश दिया?

अपडेट Oct 20, 2023 02:00 pm IST
जयपुर: राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब केवल एक महीने का ही वक्त बचा है। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को बयान दिया कि 'मैं मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन यह पद मुझे छोड़ नहीं रहा है। और शायद छोड़ेगा भी नहीं।' इसके साथ ही सीएम गहलोत ने यह भी कहा कि कांग्रेस अलाकमान का जो भी फैसला होगा, वह सबको स्वीकार होगा। गहलोत ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा कि कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार ने उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनाकर उन पर इतना विश्वास किया है तो इसकी कोई तो वजह होगी।

'भूलो और माफ करो' की नीति पर अमल किया: गहलोत

वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मतभेदों पर गहलोत ने कहा कि उन्होंने 'भूलो और माफ करो' की नीति पर अमल किया है। 2020 में पायलट के साथ जिन विधायकों ने बगावत की थी, उनमें से लगभग सभी के टिकट फाइनल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि 'मैंने किसी का विरोध नहीं किया है। इससे आप लोग अंदाजा लगा लीजिए कि आपस में हम लोगों के बीच कितना प्यार-मोहब्बत है।'

जीत की संभावना ही उम्मीदवारी का मुख्य आधार: गहलोत

टिकटों के बंटवारे के संदर्भ में गहलोत ने कहा कि जीत की संभावना ही उम्मीदवारी का मुख्य आधार होगा। गहलोत ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष को अपना शत्रु समझते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह भी किया कि वह देश में सामाजिक सुरक्षा का कानून बनाएं।

बीजेपी को क्या मैसेज दे रही है कांग्रेस?

दिल्ली में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना और यहीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मध्य प्रदेश की जनता को संदेश देना बहुत कुछ कहता है। विधानसभा चुनाव में यह कहीं न कहीं दोनों दलों की रणनीति के हिसाब से हुआ। कांग्रेस ने अशोक गहलोत से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवा कर संदेश देने की कोशिश की अब राजस्थान में सब कुछ ठीक है। सचिन पायलट के साथ अब सीएम गहलोत को भी कोई समस्या नहीं है।

गहलोत ने विधायकों के टिकट काटे जाने से लेकर तमाम मसलों पर ऐसे समय दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जब पार्टी हाई कमान की गहलोत के करीबियों को लेकर नाराजगी की खबरें आ रही थीं। उधर, BJP ने पीएम मोदी की चिट्ठी से फिर मध्य प्रदेश में संदेश दिया कि इस बार उनके चेहरे, काम और राज्य में सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ रही है।

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