मेनू

जगद्गुरु रामभद्राचार्य एयर एम्बुलेंस से देहरादून शिफ्ट सीने में दर्द की शिकायत के बाद आगरा में हुए थे भर्ती

अपडेट Feb 03, 2024 12:15 pm IST

तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज की शुक्रवार सुबह तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत पर उनको आगरा के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां उनका इलाज किया गया।

मगर, हालत में सुधर नहीं होने पर जगतगुरु को आगरा से सिनर्जी हॉस्पिटल, देहरादून रेफर कर दिया गया। उन्हें एम्बुलेंस से पहले आगरा एयरपोर्ट ले जाया गया। फिर एयर एम्बुलेंस से देहरादून शिफ्ट किया गया।

वहीं, सीएम योगी ने रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी को फोन करके उनका हालचाल जाना।

आगरा के पुष्पांजलि हॉस्पिटल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि सीने में दर्द की शिकायत पर उनको यहां लाया गया था। यहां उनका डॉ. नवनीत शर्मा ने ट्रीटमेंट किया। शुरुआती जांच में चेस्ट में इंफेक्शन की बात सामने आई थी।

4 साल पहले बाइपास सर्जरी हो चुकी है
सूत्रों के मुताबिक, रामभद्राचार्य की 4 साल पहले बाइपास सर्जरी हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टर हर तरह की जांच कर रहे हैं। रामभद्राचार्य को एयर एम्बुलेंस से दिल्ली शिफ्ट करने की बात भी चली थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कहा जा रहा है कि देहरादून के सिनर्जी अस्पताल में पहले भी उनका ट्रीटमेंट हो चुका है।

हाथरस में कर रहे थे रामकथा
रामभद्राचार्य महाराज की हाथरस के गांव लाढपुर में राम कथा चल रही है। 25 जनवरी से शुरू हुई रामकथा का शुक्रवार को आखिरी दिन है। हालांकि, अब वह रामकथा में शमिल नहीं होंगे। बुधवार को रामकथा के दौरान जगदगुरु ने कहा था कि सनातन के विरोधियों से लड़ने के लिए शक्ति चाहिए। सभी लोग नशे का त्याग करें। मादक पदार्थों का सेवन विनाश की ओर ले जाता है।

रामभद्राचार्य से जुड़ी कुछ बातें ...

  • रामभद्राचार्य जब 2 माह के थे तो उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। रामचरितमानस का गहन अध्ययन रामभद्राचार्य ने किया है। 2015 में इन्हें पद्म विभूषण सम्मान से भी नवाजा गया।​ रामानंद संप्रदाय के 4 जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक रामभद्राचार्य हैं।
  • 22 भाषाएं आती हैं, 80 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के संस्थापक हैं और आजीवन कुलाधिपति भी हैं।
  • साल 2019 में प्रधानमंत्री के शपथ समारोह की एक तस्वीर लगातार टीवी में दिखाई जा रही थी। उस तस्वीर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गेरुआ वस्त्र धारण किए हुए एक धर्म गुरु का हाथ पकड़कर उन्हें बैठाने के लिए ले जा रहे थे। ये अप्रैल 2018 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी करने वाले चित्रकूट के संत रामभद्राचार्य ही थे।
    • साल 2020 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट आए थे, तब व्यस्त शेड्यूल के बावजूद उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मिलने का वक्त निकाला था। जगदगुरु चित्रकूट में स्थित धार्मिक और सामाजिक संस्था तुलसी पीठ के फाउंडर और मुखिया हैं। स्वामी रामभद्राचार्य विश्व हिंदू परिषद के भी नेता हैं।
    • रामभद्राचार्य को तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बारे में बोलने के लिए केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में इन्हें अधिकार प्राप्त है। रामभद्राचार्य इलाहाबाद हाईकोर्ट में चले जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में एक्सपर्ट के तौर पर भी शामिल थे।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

विज्ञापन

Advertisement