जिस तरह एक कहावत है कौआ कान ले गया तो कुछ निर्बुद्धि कौए के पीछे भगते है अपना कान चेक नहीं करते इसी तरह कुछ विपक्षी विघटन संतोषी आजकल एक हवा बनाकर रखें है कि वन मंत्री को हटाया जा रहा ।अब जरा इन पहलुओं पर ध्यान दीजिए जो पार्टी भक्त 35 सालों से पार्टी की सेवा कर रहा ।लगातार अजेय विधायक है हरसूद विधानसभा से कई बार मंत्री रहे कई विभागों में आजतक उनकी कॉलर में एक दाग नहीं है अब बात कर रहे अवैध सम्प्पति की तो जरा गौर से सोचिए जिनके पास राजसी खानदान का तमगा लगा है जिनकी पूरी की पूरी एक रियासत है क्या वह ग्राम से शहर में जमीन नहीं खरीद सकते।रही बात लोकायुक्त की तो कोई भी जांच एजेंसी कागज का पेट भरकर अपना काम करती है शिकायत करता द्वारा जमीन के कागज दिए और आरोप लगा दिया अवैध सम्प्पति खरीदी परिवार के नाम से तो लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया ।लाखों केस दर्ज है सभी पर जब दोषी पाए जाएंगे तभी न कह सकते हो कि कुँवर विजय शाह गलत थे।पर राजनीति में यही होता जिसकी लोकप्रियता बड़ी ओर उसके हजार दुश्मन हुए।पर जिस तरह केंद्रीय नेतृत्व जनजातियों के वोट बैंक को बढ़ाने कई जतन कर रही इसको देखकर दूर दूर तक ऐसा नही लगता कि पार्टी अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारेगी।
क्योंकि कुँवर विजय शाह घर से भी राजा है दिल के भी राजा।