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महाकाल के आंगन में आज मकर संक्रांति:तिली के पकवानों का भोग लगाया; आज तीर्थ स्नान-दान का अधिक महत्व

अपडेट Jan 15, 2023 04:39 pm IST

मकर संक्रांति आज 15 जनवरी को भी मनाई जा रही है। शनिवार रात 8.50 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही संक्रांति संक्रमण काल शुरू हो गया। इससे अगले दिन के सूर्योदय यानी आज से पर्व मनाया जा रहा है। सूर्य के राशि परिवर्तन से उत्तरायण प्रारंभ हो जाता है। यह जून-जुलाई तक रहता है।

मिथुन से जब कर्क में सूर्यदेव प्रवेश करेंगे, तब दक्षिणायण होगा। उत्तरायण से देवकार्य और शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार धर्म और कर्म के मान से मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाना चाहिए।

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर्व पर तड़के सुबह 4 बजे भस्मारती के दौरान भगवान महाकाल को तिली से बना उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया गया। भांग, सूखे मेवे से श्रृंगार कर नए वस्त्र और आभूषण धारण कराए गए। बाबा महाकाल को तिली से बने पकवानों का भोग लगाकर आरती गई।

सांदीपनि आश्रम में श्री कृष्ण का तिल के जल से स्नान

भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में रविवार को भी मकर संक्रांति मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का तिल युक्त जल से अभिषेक-पूजन हुआ। भगवान को सर्दी के अनुरूप वस्त्र धारण कराए गए। 5 तरह के तिली से बने पकवानों का भोग लगाकर आरती की गई।

इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति के दिन तीर्थ स्थल पर स्नान के साथ दान आदि का महत्व है। सुबह तीर्थ स्नान और तिल से बने पकवान, कंबल, ऊनी वस्त्र, चावल-मूंग की दाल आदि वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है। संक्रांति पर मोक्षदायिनी शिप्रा में स्नान का महत्व होने से श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिरों में दर्शन-पूजन कर दान-पुण्य किया जा रहा है।

दो तिथियों पर पर्व क्यों?

ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार, 14 जनवरी को कुछ सालों से यह पर्व मनाया जाता रहा है और अब 15 जनवरी को भी मनाया जाने लगा है। यह पृथ्वी के देशांतर कालांतर की वजह से हाे रहा है। आगामी समय में एक दिन और बढ़ सकता है। यह पर्व सूर्य से संबंधित है। पर्वकाल सूर्य और चंद्र के अनुसार मनाए जाते हैं। इसमें यह सूर्य का पर्वकाल है और सूर्य 12 महीने में 12 राशियों में प्रवेश करते हैं, लेकिन माघ माह में सूर्य अपनी राशि मकर में प्रवेश करते हैं, इसलिए ये मकर संक्रांति पर्व कहलाता है।

सूर्य के स्व राशि में जाने का अलग-अलग असर

ज्योतिषि एवं भागवताचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि 14 और आज 15 जनवरी को भी श्रद्धालु दान-स्नान कर रहे हैं। 15 जनवरी को स्नान व दान-पुण्य करना उचित माना गया है। यह रविवार को होने से इसका ज्यादा महत्व है। इस दिन सफेद तिल, कंबल, गर्म कपड़े, तांबे का कलश, पादुका आदि का दान करना चाहिए। पं. शर्मा ने सूर्य का स्व राशि मकर में प्रवेश को लेकर 12 राशियों पर अलग-अलग असर बताए हैं। इन राशियों पर यह असर रहेगा।



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