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चीन के साथ रिश्‍ते स्‍वर्ग में बने, आंख मूंदकर करते हैं भरोसा... पाकिस्‍तानी पीएम चापलूसी पर क्‍यों उतरे?

अपडेट Oct 20, 2023 02:20 pm IST
इस्‍लामाबाद: चीन के बेल्‍ट एंड रोड सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने पहुंचे पाकिस्‍तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर ने राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। काकर ने कहा कि पाकिस्‍तान और चीन के रिश्‍ते स्‍वर्ग में बने हैं और हमारा देश चीन पर आंख मूंदकर भरोसा करता है। पाकिस्‍तानी पीएम ने भी यह भी चीन को भरोसा दिया कि उनका देश ऐसा कुछ भी नहीं करेगा कि जिससे द्विपक्षीय रणनीतिक भागीदारी को नुकसान पहुंचे। पीएम काकर चीन के राष्‍ट्रपति की यूं ही चापलूसी नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके पीछे ड्रैगन का सख्‍त रुख है। दरअसल, चीन ने चाइना पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर या सीपीईसी के विस्‍तार पर रोक लगा दी है और कंगाल पाकिस्‍तान को पैसे की सख्‍त जरूरत है।

पाकिस्‍तानी पीएम के साथ मुलाकात के बाद शी जिनपिंग ने कहा क‍ि चीन पाकिस्‍तान के साथ अपनी परंपरागत भागीदारी को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और द्विपक्षीय भागीदारी को भी मजबूत किया जाएगा। शी जिनपिंग ने यह भी भरोसा दिया कि चीन सीपीईसी और क्षेत्र में शांति को लेकर प्रतिबद्ध है। जिनपिंग ने अपने इस बयान के जरिए भारत को भी संदेश दिया कि वह पाकिस्‍तान के साथ खड़े हैं। पाकिस्‍तानी पीएम ने इसके जवाब में कहा कि उनका देश 'एक चीन' नीति का समर्थन करता है।

पाकिस्‍तान के सीपीईसी से पैर खींच रहा चीन


केयरटेकर पाकिस्‍तानी पीएम काकर ने दावा किया कि बीआरआई से न केवल भौगोलिक कनेक्टिविटी बढ़ेगी बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था में एक स्थिरता भी आएगी। पाकिस्‍तानी पीएम बीआरआई की तब तारीफ कर रहे हैं जब दुनिया में जिनपिंग के प्रॉजेक्‍ट को कर्ज में फंसाने वाला माना जा रहा है। चीन बीआरआई के तहत पाकिस्‍तान में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है लेकिन पाकिस्‍तान के धोखा देने और आर्थिक संकट की वजह से अपने पैर खींच रहा है। इससे पहले इमरान खान ने सीपीईसी परियोजना की हकीकत समझकर इसे लटका दिया था जिससे चीन भड़क गया था।

चीन ने पिछले 10 साल में पाकिस्‍तान में खुद को ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट और समुद्री रास्‍तों तक ही सीमित रखा है। वह भी तब जब उसने बीआरआई के तहत दुनियाभर में रेल और सड़क मार्ग बनाए हैं। चीन की कंपनियों ने पाकिस्‍तान के आधारभूत ढांचे में 25 अरब डॉलर का निवेश किया है लेकिन उद्योगों और कृषि उत्‍पाद के निर्यात से ड्रैगन ने दूरी बना रखी है। पाकिस्‍तान अब सीपीईसी को फिर से आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है ताकि उसकी कंगाली चीनी डॉलर की मदद से दूर हो जाए। खुद पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख देश के आर्थिक हालात को सुधारने में जुट गए हैं। उनके ही इशारे पर केयरटेकर पीएम काकर की नियुक्ति की गई है।


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