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व्हाट्सएप पर दो सूचियां वायरल होने से मप्र के नर्सिंग अफसरों में खलबली

अपडेट Jun 19, 2026 11:12 am IST

भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में इन दिनों तबादलों की बयार क्या चली, जालसाजों ने सीधे कमिश्नर (आयुक्त) के दस्तखत और सरकारी सील की ही 'क्लोनिंग' कर डाली।

विभाग में नर्सिंग अफसरों के तबादले क्या हुए, पर्दे के पीछे सक्रिय कुछ 'शातिर दिमागों' ने असली सूची के समानांतर एक ऐसी फर्जी ट्रांसफर लिस्ट बाजार में तैरती कर दी, जिसे देखकर खुद विभाग के बड़े अफसर और तबादला पाए कर्मचारी सिर पकड़कर बैठ गए हैं।

दोनों सूचियां इंटरनेट मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में इस कदर तूफान मचा रही हैं कि लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि सच कौन सा है और झूठ कौन सा।

असली में 329 नाम, फर्जी में 11 'वीआईपी' एक्स्ट्रा

जालसाजी का लेवल इतना परफेक्ट है कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए।
शब्दावली और दस्तखत बिल्कुल कॉपी: असली सूची और फर्जी सूची की ड्राफ्टिंग में एक पूर्णविराम का भी अंतर नहीं है। फर्जी लिस्ट भी बकायदा आयुक्त धनराजू एस के नाम से ही जारी दिखाई गई है।
आखिरी पन्नों पर हुआ खेल: शातिरों ने असली सूची के 329 नामों में से कुछ को हटाया और अपने हिसाब से 11 अतिरिक्त नाम जोड़कर कुल 340 नामों की भारी-भरकम 'फर्जी लिस्ट' तैयार कर दी।

असमंजस में नर्सिंग अफसर

इस फर्जीवाड़े के बाद से चिकित्सा शिक्षा विभाग के गलियारों में गजब का कौतूहल है। जिन नर्सिंग अधिकारियों के नाम इस तथाकथित लिस्ट में हैं, वे भारी तनाव और असमंजस में हैं। वे बार-बार वल्लभ भवन और संचालनालय के चक्कर काट रहे हैं ताकि यह कन्फर्म हो सके कि उन्हें सचमुच नई पोस्टिंग पर बोरिया-बिस्तर समेटना है या यह सिर्फ किसी की शरारत है।

जांच में जुटा विभाग

विभागीय सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग अब उन 'अदृश्य' कंप्यूटर ऑपरेटरों और बिचौलियों की तलाश में साइबर सेल की मदद ले रहा है, जिन्होंने इस पूरी सूची को मॉर्फ किया है।
शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि फर्जी सूची में जिन कर्मचारियों के नाम 'अतिरिक्त' तौर पर जोड़े गए हैं, यह उन्हीं में से किसी की या उनके करीबियों की हरकत हो सकती है, जो मनचाही जगह ट्रांसफर की आस में इस हद तक आगे निकल गए।


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