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पढ़ाई 'प्राइवेट' में और फायदा 'सरकारी' का, बिहार के 19 हजार छात्रों को 'पाठक जी' ने धर लिया

अपडेट Dec 09, 2023 01:07 pm IST
अरवल: बिहार में केके पाठक ने ये साफ कर दिया है कि शिक्षकों को हर हाल में सिर्फ पढ़ाना होगा और बच्चों को स्कूल आकर पढ़ना ही होगा। इसमें जो भी लापरवाही बरतेगा या गैरहाजिर रहेगा, उसकी नपाई कर दी जाएगी। वहीं केके पाठक की नजर वैसे बच्चों पर भी है जो पढ़ते तो हैं प्राइवेट स्कूल में, लेकिन पोशाक राशि और बाकी फायदों के लिए उन्होंने अपना एडमिशन सरकारी स्कूल में भी करा रखा है। इसी की जांच के दौरान बिहार के एक जिले में लगातार गिर रही बच्चों की हाजिरी पर शिक्षा विभाग की नजर गई। जब जांच पड़ताल की गई तो सबकुछ सामने आ गया। फिर शिक्षा विभाग ने एक साथ सैकड़ों छात्रों को नाप डाला।

19 हजार स्टूडेंट्स का एडमिशन कैंसिल

बिहार में शिक्षा विभाग के ACS और IAS केके पाठक शिक्षकों के साथ छात्रों पर भी नजर रखवा रहे हैं। उनका मकसद है कि सरकारी स्कूलों में भी बच्चों की संख्या बढ़े। इसके बावजूद बिहार के अरवल जिले के कई स्कूलों में बच्चों की हाजिरी 50 फीसदी से भी कम पाई गई। ऐसे में बिना ठोस वजह बताए 15 दिनों तक गैरहाजिर रहे 19 हजार स्टूडेंट्स का एडमिनशन ही कैंसिल कर दिया गया।

9 प्रिंसिपलों पर भी गिरी गाज

शिक्षा विभाग ने इसके बाद लापरवाही को लेकर ऊपर से भी गर्दन पकड़नी शुरू की। अरवल के ही 9 स्कूलों के प्रिंसिपलों की सैलरी पर फौरन रोक लगा दी गई। उन्हें ताकीद किया गया है कि वो अपने स्कूलों में 75 फीसदी छात्रों की हाजिरी फौरन से पेश्तर तय करके दिखाएं। अगर डेटा देखें तो
  • अरवल में 621 सरकारी स्कूल
  • बीपीएससी के जरिए अरवल में 1,140 शिक्षकों की बहाली
  • 1,013 शिक्षकों ने अरवल जिले के अलग-अलग स्कूलों में कर ली जॉइनिंग

पढ़ते थे प्राइवेट में और फायदा ले रहे थे सरकारी का

जब बच्चों की कम उपस्थिति का राज खुला तो विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए। हालांकि इसमें गलती बच्चों की नहीं बल्कि अभिभावकों का लालच था। इसी 6 दिसंबर को शिक्षा विभाग की एक टीम ने अरवल जिले में एक साथ कई स्कूलों की जांच की। इसी में पता चला कि करीब 20% स्कूलों में बच्चों की हाजिरी 50 फीसदी से भी नीचे है। इस कड़ी में उच्च विद्यालय शहर तेलपा आनंदपुर, उत्क्रमित मिडिल स्कूल पुरैनिया, सुनील संस्कृत स्कूल गनियारी, उत्क्रमित विद्यालय मिर्जापुर, मिडिल स्कूल गनियारी, हाई स्कूल बेलखारा के अलावा कई और स्कूलों में विजिट किया गया। पता चला कि यहां ज्यादातर बच्चों के अभिभावकों ने उनका एडमिशन निजी स्कूल में भी करा रखा है। सरकारी स्कूलों में भी पैरलल एडमिश है, लेकिन छात्र या छात्रा यहां पढ़ने आते ही नहीं। इनका सरकारी स्कूलों में एडमिशन सिर्फ सरकार की तरफ से दी जाने वाली पोशाक राशि, किताब राशि के लिए कराया गया था। इसी के बाद 19 हजार छात्र-छात्राओं का एडमिशन रद्द कर दिया गया।

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