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बटर-चिकन और दाल मखनी किसने ईजाद किया दिल्ली के मोती महल और दरियागंज रेस्टोरेंट का दावा

अपडेट Jan 20, 2024 01:09 pm IST

देश की फेमस डिश बटर चिकन और दाल मखनी का ईजाद किसने किया, इसका फैसला दिल्ली हाईकोर्ट करेगा। दिल्ली के मोती महल रेस्टोरेंट (रूपा गुजराल) और दरियागंज रेस्टोरेंट (दरियागंज हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड) बीते दो साल से इन दोनों डिश पर अपना-अपना दावा करते आए हैं।

मोती महल रेस्टोरेंट ने दरियागंज रेस्टोरेंट पर ‘बटर चिकन और दाल मखनी के निर्माता’ टैगलाइन के इस्तेमाल को लेकर केस दर्ज किया है। मोती महल का दावा है कि दरियागंज रेस्टोरेंट लोगों को गलत जानकारी दे रहा है कि दरियागंज रेस्टॉरेंट और मोती महल के बीच कोई संबंध है, क्योंकि मोती महल की पहली ब्रांच दिल्ली के दरियागंज इलाके में खुली थी।

जस्टिस संजीव नरूला ने 16 जनवरी को मामले की सुनवाई की और दरियागंज रेस्टोरेंट के मालिकों को एक महीने में अपना लिखित रिस्पॉन्स दाखिल करने को कहा। जस्टिस नरूला ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख दी है।

दोनों रेस्टोरेंट के पूर्वज का नाम कुंदन लाल
दरियागंज रेस्टोरेंट के मालिकों का दावा है कि उनके पूर्वज स्वर्गीय कुंदन लाल जग्गी ने इन व्यंजनों की रेसिपी ईजाद की थी। वहीं, मोती महल के मालिकों का कहना है कि उनके पूर्वज स्वर्गीय कुंदन लाल गुजराल ने इन व्यंजनों को पहली बार बनाया था।

मोती महल ने ये भी कहा कि कुंदन लाल गुजराल ने ही पहली बार तंदूरी चिकिन बनाया था और बाद में बटर चिकन और दाल मखनी बनाई। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद वे इन डिश को भारत लेकर आए थे। पुराने समय में जो चिकिन बिक नहीं पाता था, उसे रेफ्रीजेरेटर में नहीं रखा जा सकता था। तब गुजराल को पके हुए चिकिन के ड्राई होने की चिंता होने लगी। इसलिए उन्होंने ऐसा सॉस बनाया जिससे चिकिन ड्राई न हो।

उन्होंने तब टमाटर, बटर, क्रीम और मसालों को मिलाकर ग्रेवी बनाई, जिससे इस डिश में नया स्वाद आया। मोती महल ने अपनी याचिका में कहा कि इसी की तर्ज पर गुजराल ने दाल मखनी बनाई। उन्होंने काली दाल के साथ यही रेसिपी अपनाई और इससे दाल मखनी बनी।

दरियागंज रेस्टोरेंट का दावा- पहला मोती महल रेस्टोरेंट दोनों रेस्टोरेंट मालिकों ने मिलकर खोला था
इस मामले में दरियागंज की तरफ से जवाब दाखिल नहीं किया गया है। हालांकि, 16 जनवरी की सुनवाई में दरियागंज रेस्टोरेंट की तरफ से वकील ने अपना पक्ष रखा और पूरे केस को आधारहीन और बेमतलब बताया। दरियागंज रेस्टोरेंट का कहना है कि पहला मोती महल रेस्टोरेंट पेशावर में दोनों रेस्टोरेंट्स के पुराने मालिकों (मोती महल के गुजराल और दरियागंज के जग्गी) ने मिलकर खोला था।



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