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आयुर्वेद हमारा सामर्थ्य है, इसके एकस्व दस्तावेजीकरण को समझने की आवश्यकता : आयुष मंत्री श्री परमार

अपडेट Jan 25, 2024 11:51 am IST

देश की वानस्पतिक एवं औषधीय धरोहर को तथ्यात्मक एवं प्रामाणिक दस्तावेज के साथ विश्व के समक्ष रखना है। इसके लिए हमें स्वयं के सामर्थ्य पर विश्वास का भाव जागृत करने की आवश्यकता है। आयुर्वेद हमारा सामर्थ्य है, आयुर्वेद अतीत में भी विश्वमंच पर सार्वभौमिक, जनकल्याणकारी एवं विश्वसनीय रहा है और भविष्य में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध करेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान के रजत जयंती ऑडिटोरियम में "भारतीय आयुर्वेदीय भेषज संहिता की समृद्धि के लिये वानस्पतिक प्रजातियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं प्रलेखीकरण" विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के अवसर पर कही।

श्री परमार ने कहा कि वानस्पतिक एवं औषधीय मंथन से आयुर्वेद को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा, विमर्श प्रक्रिया का यह क्रम सतत जारी रहे। आयुर्वेद, मनुष्य को वैचारिक एवं शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ रखता है। अपने आयुर्वेदीय सिद्धांतों एवं मूल्यों के एकस्व दस्तावेजीकरण (पेटेंट) के महत्व को समझने की आवश्यकता है। अपनी आयुर्वेदीय धरोहर की सुरक्षा, संरक्षण एवं उत्थान के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। श्री परमार ने कहा कि इस संगोष्ठी का विचार-मंथन; एकस्व दस्तावेजीकरण (पेटेंट) के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की भूमिका को विश्वपटल पर स्थापित करेगा। श्री परमार ने भारतीय आयुर्वेदीय भेषज संहिता की समृद्धि के संबंध में व्यापक विचार मंथन के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन लिए संस्थान को शुभकामनाएं भी दी।

इस दौरान आयुर्वेद शोध एवं प्रशिक्षण के साथ आयुर्ज्ञान-विज्ञान के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान, भोपाल एवं पतंजलि शोध पीठ हरिद्वार के मध्य अनुबंध ज्ञापन भी हस्ताक्षरित हुआ।

इस अवसर पर विधायक भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) श्री भगवान दास सबनानी, पतंजलि शोध पीठ हरिद्वार की डॉ वेदप्रिया आर्य एवं संस्थान के प्रधानाचार्य प्रो. उमेश शुक्ला सहित देश भर से पधारे विभिन्न सहभागी वैज्ञानिक एवं विषयविद सहित प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।



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