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राजधानी में बढ़ रहे महिलाओं के खिलाफ अपराध, कई मामलों में पुलिस के हाथ खाली

अपडेट Sep 14, 2023 12:33 pm IST

भोपाल।  राजधानी की पुलिस कमिश्नरी की पुलिस का महिला अपराधों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है, पिछले एक माह में राजधानी में तीन ऐसे गंभीर महिला अपराध हुए हैं, उनको पुलिस ने पहले तो छिपाने की कोशिश की, जब सामने आए तो एफआइआर दर्ज कर आरोपितों को भूल गई, घटना को हुए करीब एक माह पूरा होने को आ गया है,लेकिन आरोपित की कोई खोज खबर पुलिस नहीं ले रही है। ऐसे एक दो नहीं पूरे तीन मामले हैं। जिनके आरोपित फरार है।

मनचले ने नाबालिग के गाल पर काटा

एक माह पहले टीटीनगर के अलटपथ पर नेहरु नगर निवासी एक नाबालिग को रास्ता रोककर एक मनचले ने उसके गाल पर सरेआम काट खाया था, इस मामले में नाबालिग ने पूरा घटनाक्रम अपने स्वजनों को बताया था, बाद में स्वजनों की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपित पर गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज कर ली थी, मामला खुद पुलिस कमिश्नर के संज्ञान में आया था,लेकिन अभी तक इस मामले में कोई आरोपित नहीं पकड़ गया है, जबकि घटना के बाद से परिवार इतना सहम गया है कि कोई उनके घर मिलने जाता तो वह डर जाते हैं। नाबालिग ने कोचिंग जाना भी बंद कर दिया है।

महिला पर हमला

इसी तरह से कोलार में सात दिन पहले मनीषा पाटिल नाम की महिला अपने पति को लेने स्कूटर से बस स्टाप पर जा रही थी। रास्ते एक स्थान जाम होने के कारण उसने अपने स्कूटर की रफ्तार धीमी कर ली थी, इसी दौरान एक मनचला आया और उसने मनीषा पर धारदार चीज से हमला कर फरार हो गया, वह शिकायत करने पहुंची तो मामले में पुलिस न अंसज्ञेय अपराध मानकर उनको चलता कर दिया था। बाद में आला अधिकारियों के पास जानकारी पहुंची तो मामले में एफआइआर दर्ज की गई। इसके बाद आरोपित की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।

चार आरोपित ने महिला से किया दुष्कर्म, मामला छिपाया

बैरागढ़ इलाके में एक महिला के साथ चार लोगों ने अलग - अलग समय पर दुष्कर्म किया था। पुलिस ने महिला की शिकायत पर एफआइआर दर्ज कर ली थी, बाद में पूरे मामले को छिपा लिया था। इस मामले में अभी तक आरोपितों की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर पाई है। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों का रवैया ऐसा है कि उनको घटना की पूरी जानकारी ही नहीं थी।

सीएम के निर्देश के बाद भी गंभीर नहीं

महिला संबंधि अपराध की जांच और आरोपितों को तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश के बाद भोपाल पुलिस आरोापितों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हालात यह है कि पुलिस उपायुक्त से लेकर थानास्तर के एसीपी ऐसे मामले में निगरानी नहीं कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि थानास्तर से गिरफ्तारी नहीं हो रही है और आरोपित मजे में वारदात के बाहर घूम रहे हैं।


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