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गुरु अपने सेवक को कांच से सोना बना देते हैं : भाई चमनजीत

अपडेट Nov 06, 2023 12:42 pm IST

 भोपाल। सिख पंथ के महान रागी जत्था भाई चमनजीत सिंह लाल दिल्ली वाले ने गुरु रामदास जी की महिमा का वर्णन किया। सुबह के समय शिवाजी नगर सिंधु भवन में कीर्तन दरबार सजा। रात के समय ईदगाह हिल्स गुरुनानक टेकरी में दरबार सजाया गया। भाई चमनजीत ने प्रवचन के द्वारा और शब्द कीर्तन गुरबाणी के द्वारा संगत को निहाल किया।

गुरू की महिमा का वर्णन करते उन्होंने कहा कि गुरू चाहे तो शिष्य को कांच से कंचन (सोना) बना देता है। गुरु के शब्द में इतनी करामात है। जब गुरु के शब्द का ज्ञान शिष्य प्राप्त कर लेता है। शिष्य कांच के समान होता है जिसकी कोई मूल्य नहीं होता, उसको गुरु कंचन सोना कर देते हैं।पारस के साथ लोहा भी छू जाए, लोहे को सोना कर सकता है, लेकिन सतगुरु ऐसे पारस है वह सेवक को भी सद्गुरु बना सकते हैं, अपने सामान बना सकते हैं। पारस लोहे को सोना तो बन सकता है लेकिन पारस लोहे को पारस नहीं बन सकता। गुरु सेवक को वह अपने सामान बना देता है। जैसे गुरु नानक देव जी ने भाई लहना जी को गुरु नानक साहिब ने अपना रूप बना लिया। गुरु अंगद देव साहब जी ने गुरु अमरदास जी को अपना रूप कर दिया इसी तरह गुरु अमर दास जी ने गुरु रामदास को अपना रूप कर दिया। दोनों कीर्तन दरबार में गुरचरण सिंह अरोड़ा,घनश्याम थरानी, बसंत चेलानी सहित सिख समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


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