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'लस्ट स्टोरीज 3' रिव्यू: रिश्तों की गुत्थियों को सुलझाती अंतरंग प्रेम कहानियां, विशाल भारद्वाज पड़े सब पर भारी

अपडेट Sep 18, 2026 12:45 pm IST

मूवी रिव्यू: लस्ट स्टोरीज 3

हमारे समाज में औरतों की सेक्सुअल जरूरतों और इच्छाओं को हमेशा गैरजरूरी और टैबू विषय माना गया है। हालांकि, पिछले कुछ साल में 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का', 'थैंक यू फॉर कमिंग', और 'लस्ट स्टोरीज' जैसी फिल्मों या एंथोलॉजी ने इस विषय को प्रमुखता दी है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाती है, प्यार के रिश्ते की जटिलताओं की पड़ताल करती एंथोलॉजी 'लस्ट स्टोरीज 3', जिसमें इंडस्ट्री के चार नामी फिल्मकारों विक्रमादित्य मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज की साझेदारी से बनी चार शॉर्ट फिल्‍मों की इस माला में दो कहानियों में औरतों की शारीरिक जरूरतों वाले अहम पहलू पर जोर है।

'लस्ट स्टोरीज 3' की कहानी

विक्रमादित्य मोटवाने निर्देशित शॉर्ट फिल्म उम्र के 40वें साल में मिड लाइफ क्राइसिस से गुजर रहीं दो पक्की सहेलियों शोना (कोंकणा सेन शर्मा) और पद्मा उर्फ पैडी (राधिका आप्टे) की है। कोरियन शोज देखने वाली इन सहेलियों की सेक्स लाइफ फुस्स है। दोनों के पतियों (क्रमश: अभिषेक बनर्जी और विजय वर्मा) को उनकी फीलिंग की कद्र नहीं है। इसलिए, शोना और पैडी संग मिलकर अपने पतियों की अदला-बदली की योजना बनाती हैं।
किरण राव निर्देशित कहानी में डिलिवरी बॉय करण (गुरफतेह सिंह पीरजादा) और नेल आर्टिस्ट लीसा (सना थंपी) के बीच पहली मुलाकात में पनपे लस्ट और धोखेबाजी की मॉडर्न कहानी है। दोनों के बीच का जिस्मानी आकर्षण किस तरह धोखे का सबब बनता है, यह देखना मजेदार है।
शकुन बत्रा निर्देशित कहानी तलाक की कगार पर पहुंचे एक जोड़े वरुण आप्टे (अली फजल) और सायली वैद्य (राधिका मदान) की है, जिनके कॉम्प्लिकेटेड रिश्ते में इंटीमेसी ही सुकून के दो पल की वजह बनती है। शकुन आज वाकई जटिल हो चुके प्यार और शादी के रिश्ते की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करते हैं और उसमें पैशनेट लव, बातचीत और थेरेपी के महत्व पर जोर देते हैं।

विशाल भारद्वाज निर्देशित आखिरी कहानी सबसे मजेदार और असरदार है। विशाल दर्शकों को 80 के दौर में हैदराबाद की गलियों में ले जाते हैं। यहां मंटो पढ़ती-पढ़ाती पीएचडी स्कॉलर सायरा (अदिति राव हैदरी) अपने हकीम शौहर डॉक्टर बदरू (सिद्धार्थ) के बिस्तर में 'आए मियां चटपट, गए मियां झटपट' वाले अंदाज से आजिज आकर अंतरंग कल्पनाओं के रंगीन सपनों में ऐसी खोती है कि खुद लेडी मस्तराम यानी सेक्स नॉवेल लेखिका चुलबुली बेगम बन जाती है।

'लस्‍ट स्‍टोरीज 3' रिव्‍यू

विक्रमादित्य मोटवाने अपनी कहानी में एक देसी औरत के अरमानों के साथ उसकी असुरक्षा, डर, जलन जैसे मनोभावों को भी दिखाते हैं, लेकिन उनकी यह कहानी सिर्फ एक शॉक वैल्यू यानी चौंकाने का काम करती है। पटकथा काफी उथली सी है, इसलिए कोंकणा और राधिका जैसी दमदार ऐक्ट्रेसेज के बावजूद यह न तो रिलेटेबल लगती है, न ही बड़ा प्रभाव छोड़ पाती है।

किरण राव की कहानी एक हल्की-फुल्की मजेदार टाइमपास साबित होती है। गुरफतेह सिंह पीरजादा और सना थंपी भी प्रभावित करते हैं।
शकुन बत्रा की कहानी थोड़ी उलझी जरूर लगती है, लेकिन अली फजल और राधिका मदान की इंटेंस एक्टिंग के सहारे वह अपना संदेश और प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहते हैं।

विशाल भारद्वाज ने 'लस्ट स्टोरीज' की थीम को अपनी कहानी, उसके माहौल से हर तरह से जस्टिफाई करते हैं। साथ ही हल्के-फुल्के टोन में औरतों और उसकी जिस्मानी जरूरतों को प्रगतिशील नजरिए से दिखाते हैं। एक्टिंग के मामले में भी रियल लाइफ कपल अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ की केमिस्ट्री जोरदार है। कुल मिलाकर, 'लस्ट स्टोरीज' नाम के इस फोर कोर्स मील का यह सबसे स्वादिष्ट व्यंजन है।

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