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देश की 36 लोक शैलियों में कैनवास पर उतरी राम चित्र शृंखला, ओरछा के रामराजा मंदिर में जुड़ा नया आयाम

अपडेट Sep 11, 2023 01:02 pm IST
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र को चित्रों के माध्यम से आमजन के सामने लाने की अनूठी पहल की है। संस्कृति विभाग द्वारा ओरछा के श्री रामराजा सरकार मंदिर परिसर में श्रीरामराज्य कला दीर्घा की स्थापना की गई है। इसके लिए देश की 36 चित्र शैलियों के जरिए श्रीराम के श्रेष्ठ जीवन चरित्र को चित्रांकित किया गया है। इसे अपनी-अपनी शैलियों में प्रख्यात चित्रकारों ने कैनवास पर कूंची चलाकर जीवंत किया है। चित्रों में भगवान राम की शिक्षा, विवाह, राज्याभिषेक, वनवास और रावण से युद्ध का चित्रण किया गया है।

प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की झांकी विशेष

ओरछा में भगवान राम राजा के रूप में पूजे जाते हैं, इसलिए यहां राज्याभिषेक की झांकी व महल का दृश्य भी विशेष तौर पर बनवाया गया है। संस्कृति विभाग का दावा है कि रामराजा की देश में यह अपनी तरह की पहली दीर्घा है।


इन 36 शैलियों में हुआ चित्रण

जिन 36 चित्र शैलियों में भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का प्रदर्शन किया गया है, वे हैं - मेवाड़, बूंदी, किशनगढ़, कोटा, जयपुर, बीकानेर, मारवाड़, आमेर, अलवर, शेखावटी, देवगढ़, नागौर, नाथद्वारा, उदयपुर, सिरोही लघुचित्र शैली, फड़ लोकचित्र शैली (राजस्थान), गंजीफा, मैसूर, विजयनगर (कर्नाटक), चेरियालपटम, कलमकारी (आंध्रप्रदेश), पटुआ (बंगाल), केरला म्यूरल (केरल), नायका व तंजावुर (तमिलनाडु), मातानी पछेड़ी (गुजरात), बसौली, गुलेर लघुचित्र (हिमाचल), उडिया पट्ट (ओडिशा), चित्रकथी (महाराष्ट्र), मधुबनी (बिहार), बुंदेली कलम, गोंड जनजाति, भील जनजाति (मध्य प्रदेश) तथा दो आधुनिक शैलियां।

श्रेष्ठता स्थापित करते हैं चित्र

पूरी प्रक्रिया से जुड़े रहे मप्र जनजातीय संग्रहालय के अध्यक्ष अशोक मिश्रा बताते हैं कि अलग-अलग शैलियों में चित्र का सृजन शैलीगत विविधता के साथ पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को भी अभिव्यक्त करता है। श्रीराम राज्याभिषेक की झांकी ओडिशा की पारंपरिक मूर्ति और चित्र शैली में प्रदर्शित है, जिसमें प्रमुख 18 स्वरूपों को संयोजित किया गया है।

देश में श्री रामराज्य को लेकर अपनी तरह की यह पहली दीर्घा है। प्राय: रामदरबार के साथ श्रीराम के बाल व वनवासी स्वरूप की ही पूजा होती है। भगवान श्रीराम का राजा का स्वरूप सिर्फ ओरछा में ही है। दीर्घा बताती है कि श्रीराम धरती के श्रेष्ठतम राजा रहे हैं तो इसका कारण क्या था।

                                                                                      - शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग

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