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वायरस ने बदला स्वरूप, ठंड में बढ़ रहे डेंगू के मरीज, लेकिन कम गंभीर

अपडेट Nov 28, 2023 12:37 pm IST
भोपाल। डेंगू वायरस ने अपने स्वरूप को बदल लिया है। इसके चलते डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या सर्दी में घटने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। यह बात जरूर है कि मरीज पहले की अपेक्षा कम गंभीर हैं। जेपी अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डा.योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि आम तौर पर दीपावली के बाद डेंगू का प्रकोप कम होने लगता है, लेकिन इस साल वायरस ने स्वरूप को बदला है। इसलिए सर्दी की दस्तक के बाद भी डेंगू मरीज लगातार मिल रहे हैं।

भोपाल में मिल चुके हैं 800 से ज्यादा मरीज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दिसंबर के दूसरे सप्ताह से ही डेंगू से राहत मिलने की उम्मीद है। अभी तक राजधानी में 802 लोगों के डेंगू पाजीटिव होने की पुष्टि की जा चुकी है। अभी अवकाश के तीन दिनों के सौ सैंपलों की रिपोर्ट एक साथ मंगलवार को आएगी। मलेरिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक जनवरी से अब तक 3,28,198 डेंगू, 11,666 मलेरिया और चिकनगुनिया की 1,389 जांच हो चुकी हैं। इसमें मलेरिया के 15, डेंगू के 802 और चिकनगुनिया के 120 मामले पाजीटिव पाए गए हैं। विभाग का कहना है कि सबसे ज्यादा डेंगू के मामले बैरागढ़ और बागसेवनिया क्षेत्र से आ रहे हैं।

स्ट्रेन की जांच के लिए जबलपुर भेज रहे सैंपल

डेंगू के मामले मे स्ट्रेन को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क है। डेंगू के स्ट्रेन की जांच के लिए सैंपलों को जबलपुर मेडिकल कालेज भेजा जा रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई नया स्ट्रेन भोपाल में नहीं मिला है।

इनका कहना है

मरीजों को देखने पर यह साफ लग रहा है कि वायरस ने स्वरूप बदल लिया है, लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है। मरीजों के लक्षणों में तय समय के बाद बदलाव भी दिख रहा है। पहले मरीज कम गंभीर हो रहे थे। बीच में एक समय ऐसा आया कि वो अधिक गंभीर होने लगे और अब फिर मरीज कम गंभीर हैं, लेकिन ठंड होने के बाद बाद भी मरीज मिल रहे हैं।

                                                                    - डा. योगेंद्र श्रीवास्तव, एमडी मेडिसिन, जेपी अस्पताल, भोपाल

हम डेंगू स्ट्रेन की जांच के लिए सैंपलों को लगातार भेज रहे हैं। अभी तक इसमें कुछ भी नया नहीं मिला है। मौसम की वजह से ही डेंगू के मामले बढ़-कम हो रहे हैं। दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक डेंगू पूरी तरह से नियंत्रित हो जाएगा। हालांकि लार्वा सर्वे के लिए 50 से अधिक टीम रोज काम कर रही हैं।

                                                                                                   - डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ, भोपाल

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