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मृत्यु पर विजय क्या संभव है? हमेशा जिंदा रहने की कोशिश कर रहे अरबपति को फिजिसिस्ट अल-खलीली ने बताई सच्चाई

अपडेट Sep 19, 2026 11:03 am IST
वॉशिंगटन: टेक अरबपति ब्रायन जॉनसन लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इसकी वजह उनका एक मुश्किल दिनचर्या का पालन करते हुए बढ़ती उम्र को रोकना और मौत को टालने की कोशिश है। हालांकि एक्सपर्ट को लगता है कि हमेशा जिंदा रहने की उनकी चाहत तमाम कोशिशों के बावजूद पूरा होना संभव नहीं है।फिजिसिस्ट प्रोफेसर जिम अल-खलीली का कहना है कि टेक अरबपति अपनी जिंदगी को हमेशा के लिए बढ़ाने की कोशिश में सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।

द गार्डियन को दिए एक इंटरव्यू में अल-खलीली ने कहा कि जो लोग बुढ़ापे को रोकने की कोशिश में बहुत ज्यादा समय और पैसा खर्च करते हैं, वे शायद उस समय की अहमियत को नहीं समझ पा रहे हैं जो उनके पास पहले से है। अल-खलीली ने कहा कि ब्रह्मांड में इंसान के पास समय का एक सीमित हिस्सा होता है। ऐसे में अपने पास मौजूद समय का सबसे अच्छा इस्तेमाल करना चाहिए।
ब्रह्मांड की उम्र की तुलना में हम यहां पलक झपकने भर के समय के लिए हैं। अगर मैं उस पलक झपकने भर के समय को दो बार पलक झपकने जितना बढ़ाने की कोशिश में लगा दूं तो मुझे नहीं लगता कि अपनी ज़िंदगी को इस काम में लगाना वाकई कोई फायदेमंद बात है।
जिम अल-खलीली

क्या है जॉनसन की कोशिश

दुनिया में कुछ अमीर लोग ऐसे इलाज और प्रयोगों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनका मकसद बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करना है। ऐसे ही एक शख्स टेक एंटरप्रेन्योर ब्रायन जॉनसन हैं। वह लगातार ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे बुढ़ापा ना आए और वह हमेशा जिंदा रह सकें। वह अपने 17 साल के बेटे का प्लाज्मा अपने शरीर में डलवाने की कोशिश कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने खुद माना कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ।
अल-खलीली का कहना है कि समय को रोकना संभव नहीं है। हमेशा जिंदा रहने की कोशिश करने वालों को यह समझना होगा। उन्होंने कहा, 'अगर मैं रॉकेट में अपनी घड़ी लेकर आपके पास से गुजर रहा हूं तो जिसे मैं एक सेकंड कहूंगा, वह आपके लिए एक सेकंड से लंबा होगा। मैं कहूंगा कि यह एक सेकंड बीता है और आप कहेंगे कि असल में पांच सेकंड बीत चुके हैं। आप सब कुछ स्लो मोशन में कर रहे हैं।'

समय का रहस्य

समय केवल एक ही दिशा में क्यों चलता हुआ दिखाई देता है। इस पर भौतिक विज्ञानी खलीली ने कहा, 'चीजें खराब हो जाती हैं, बैटरी खत्म हो जाती है, गेंदें ढलान पर नीचे लुढ़कती हैं और हम बूढ़े होते हैं। ये सब समय की एक दिशा की ओर इशारा करती हैं। फिर भी मूल रूप से हमारे समीकरण कहते हैं कि समय में कोई खास दिशा नहीं होती है।'

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