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H-1B वीजा पर ट्रंप ने दिया नया झटका, कंपनियों की जांच शुरू करने के ऑर्डर पर किए साइन, भारतीयों की बढ़ेगी टेंशन

अपडेट Sep 19, 2026 11:07 am IST
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ एम्प्लॉयर्स, थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट ग्रुप्स और आउटसोर्सिंग फर्म इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वह कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रख रहे हैं। ऐसे में H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस सख्ती से लागू करने और इस प्रोग्राम की निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत है। इससे भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि अमेरिका के H-1B वीजा का लाभ सबसे ज्यादा भारत के वोगों को मिलता रहा है।

वाइट हाउस की ओर से शुक्रवार को जारी इस ऑर्डर को 'H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम के एडमिनिस्ट्रेशन में प्रोग्राम की अखंडता और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना' का नाम दिया गया है। इसके पीछे वेतन में अंतर और अमेरिकी नौकरियों के नुकसान का हवाला दिया गया है।

क्या कहता है ऑर्डर

ऑर्डर के अनुसार, H-1B प्रोग्राम को खास कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बनाया गया था। जमीन पर सच्चाई ये है कि कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने और उनकी जगह लेने के लिए इस प्रोग्राम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया है।

वाइट हाउस ने दावा किया कि सस्ते H-1B कर्मचारी घरेलू वेतन पर दबाव डालते हैं। इसमें कहा गया है कि समान वेतन के कानूनी नियम के बावजूद H-1B वीजा धारक H-1B पर निर्भर उद्योगों में समान काम करने वाले अमेरिकी मूल के कर्मचारियों की तुलना में 9,000 से 20,000 डॉलर कम कमाते हैं।

अमेरिकियों को निकाला गया!

ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर के एम्प्लॉयर्स ने लाखों कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा की मांग की जबकि 2022 से 2026 के बीच 800,000 से 1.3 मिलियन अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कुछ एम्प्लॉयर्स ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से ही उनकी जगह लेने वाले विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दिलवाई।

ऑर्डर में लिखा है कि सस्ते H-1B कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल घरेलू वेतन पर दबाव डालता है। H-1B वीजा धारक अमेरिका में जन्मे समान कर्मचारियों की तुलना में कम कमाते हैं, जबकि कानूनी नियम यह है कि H-1B कर्मचारियों को उनके घरेलू साथियों के बराबर वेतन दिया जाए।

भारतीयों पर असर

H-1B प्रोग्राम के तहत अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, शिक्षा और रिसर्च जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को काम पर रख सकती हैं। अमेरिका हर साल 65,000 रेगुलर H-1B वीजा और एडवांस्ड डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 वीजा जारी करता है। फीस में बढ़ोतरी और कथित सख्त निगरानी का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ेगा।

वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका का H-1B वीजा पाने वाले 70 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी भारत से थे। इसके बाद चीन (12 फीसदी) और फिर बाकी देशों के लोग थे। जाहिर है कि अगर ये वीजा सबसे ज्यादा भारतीय पा रहे हैं तो इसका असर भी उन पर ही ज्यादा होगा। बहुत ज्यादा निगरानी और दबाव के चलते अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखना मुश्किल होगा।

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